कुंडली में अगर निम्न गृह अशुभ है तो निम्न बीमारी देंगे अपनी महादशा या अंतर दशा में:-
सूर्य : मुँह में बार-बार थूक इकट्ठा होना, झाग निकलना, धड़कन का अनियंत्रित होना, शारीरिक कमजोरी और रक्त चाप।
चंद्र : दिल और आँख की कमजोरी।
मंगल : रक्त और पेट संबंधी बीमारी, नासूर, जिगर, पित्त आमाशय, भगंदर और फोड़े होना।
बुध : चेचक, नाड़ियों की कमजोरी, जीभ और दाँत का रोग।
बृहस्पति : पेट की गैस और फेफड़े की बीमारियाँ।
शुक्र : त्वचा, दाद, खुजली का रोग।
शनि : नेत्र रोग और खाँसी की बीमारी।
राहु : बुखार, दिमागी की खराबियाँ, अचानक चोट, दुर्घटना आदि।
केतु : रीढ़, जोड़ों का दर्द, शुगर, कान, स्वप्न दोष, हार्निया, गुप्तांग संबंधी रोग आदि।
अशुभ ग्रहों का उपाय किस प्रकार से करे:
1. सूर्य : बहते पानी में गुड़ बहाएँ। सूर्य को जल दे, पिता की सेवा करे या गेहूँ और तांबे का बर्तन दान करें.
2. चंद्र : किसी मंदिर में कुछ दिन कच्चा दूध और चावल रखें या खीर-बर्फी
का दान करें, या माता की सेवा करे, या दूध या पानी से भरा बर्तन रात को
सिरहाने रखें. सुबह उस दुध या पानी से किसी कांटेदार पेड़ की जड़ में डाले
या चन्द्र के लिए चावल, दुध एवं चान्दी के वस्तुएं दान करें.
3.
मंगल : बहते पानी में तिल और गुड़ से बनी रेवाडि़यां प्रवाहित करे. या बरगद
के वृक्ष की जड़ में मीठा कच्चा दूध 43 दिन लगातार डालें। उस दूध से भिगी
मिट्टी का तिलक लगाएँ। या ८ मंगलवार को बंदरो को भुना हुआ गुड और चने
खिलाये , या बड़े भाई बहन के सेवा करे, मंगल के लिए साबुत, मसूर की दाल दान
करें
4. बुध : ताँबे के पैसे में सूराख करके बहते पानी में
बहाएँ। फिटकरी से दन्त साफ करे, अपना आचरण ठीक रखे ,बुध के लिए साबुत मूंग
का दान करें., माँ दुर्गा की आराधना करें .
5. बृहस्पति : केसर
का तिलक रोजाना लगाएँ या कुछ मात्रा में केसर खाएँ और नाभि या जीभ पर लगाएं
या बृ्हस्पति के लिए चने की दाल या पिली वस्तु दान करें.
6.
शुक्र : गाय की सेवा करें और घर तथा शरीर को साफ-सुथरा रखें, या काली गाय
को हरा चारा डाले .शुक्र के लिए दही, घी, कपूर आदि का दान करें.
7. शनि : बहते पानी में रोजाना नारियल बहाएँ। शनि के दिन पीपल पर तेल का
दिया जलाये ,या किसी बर्तन में तेल लेकर उसमे अपना क्षाया देखें और बर्तन
तेल के साथ दान करे. क्योंकि शनि देव तेल के दान से अधिक प्रसन्ना होते है,
या हनुमान जी की पूजा करे और बजरंग बाण का पथ करे, शनि के लिए काले साबुत
उड़द एवं लोहे की वस्तु का दान करें.
8. राहु : जौ या मूली या काली सरसों का दान करें या अपने सिरहाने रख कर अगले दिन बहते हुए पानी में बहाए ,
9. केतु : मिट्टी के बने तंदूर में मीठी रोटी बनाकर 43 दिन कुत्तों को
खिलाएँ या सवा किलो आटे को भुनकर उसमे गुड का चुरा मिला दे और 43 दिन तक
लगातार चींटियों को डाले, या काला सफ़ेद कम्बल कोढियों को दान करें या
आर्थिक नुक्सान से बचने के लिए रोज कौओं को रोटी खिलाएं. या काला तिल दान
करे,
अपना कर्म ठीक रखे तभी भाग्य आप का साथ देगा और कर्म ठीक हो इसके लिए आप
मन्दिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए जाएं.,
माता-पिता और गुरु जानो का सम्मान करे ,
अपने धर्मं का पालन करे,
भाई बन्धुओं से अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखें.,
पितरो का श्राद्ध करें. या प्रत्येक अमावस को पितरो के निमित्त मंदिर में दान करे,
गाय और कुत्ता पालें, यदि किसी कारणवश कुत्ता मर जाए तो दोबारा कुत्ता पालें. अगर घर में ना पाल सके तो बाहर ही उसकी सेवा करे,
यदि सन्तान बाधा हो तो कुत्तों को रोटी खिलाने से घर में बड़ो के आशीर्वाद
लेने से और उनकी सेवा करने से सन्तान सुख की प्राप्ति होगी .
गौ
ग्रास. रोज भोजन करते समय परोसी गयी थाली में से एक हिस्सा गाय को, एक
हिस्सा कुत्ते को एवं एक हिस्सा कौए को खिलाएं आपके घर में हमेशा बरक्कत
रहेगी,
एक समय में केवल एक ही उपाय करें. उपाय कम से कम 40 दिन और अधिक से अधिक 43 दिनो तक करें.
यदि किसी करणवश नागा हो तो फिर से प्रारम्भ करें., यदि कोइ उपाय नहीं कर
सकता तो खून का रिश्तेदार ( भाई, पिता, पुत्र इत्यादि) भी कर सकता है.
tantrakuldeep
Very nice post, thanks for share
ReplyDeletelove marriage specialist
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