Search This Blog

Loading...

Friday, 3 February 2012

धन

धन के उपयोग पर शुक्राचार्य




धर्माय यशसेऽर्थाय कामाय स्वजनाय च.
पञ्चधा विभजन्वित्तमिहामुत्र च मोदते.
                                            - श्रीमद्भागवत (अष्टम स्कंध, अध्याय: १९, श्लोक:३७)

शुक्राचार्य ने राजा बलि से कहा:  जो मनुष्य अपने धन को पांच भागों में बाँट देता है - कुछ धर्म के लिए, कुछ यश के लिए, कुछ धन की अभिवृद्धि के लिए, कुछ भोगों के लिए और कुछ अपने स्वजनों के लिए - वही इस लोक और परलोक
दोनों में सुख पाता है.

One who  divides his wealth in five parts for religion, reputation, opulence,  fulfillment of a desires  and his family members, is happy in this world and in the next.

No comments:

Post a Comment