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Friday, 16 September 2011

दान


कोई भी अनुष्ठान हो, दान करना हर प्राणी का परम कर्तव्य बताया गया है। पर यह भी कहा गया है कि आप जिस तरह का दान करेंगे, उसी तरह का पुण्य आपको मिलता है।
 
कुल बारह वस्तुओं गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक, कोहड़ा और कन्या के दान का जिक्र शास्त्रों में किया गया है, जिनके दान से जातक को पुण्य प्राप्ति होती है।
 
भूमिदान से परलोक में प्रतिष्ठा मिलती है,
 
 
  तिल का दान जातक को बल देता है और मृत्यु के भय से भी बचाता है।
 
  स्वर्ण के दान से जठराग्नि बढ़ती है। 
 
वही घी का दान किया जाए, तो पुष्टिकारक
 
अन्न का दान समृद्धिदायक माना गया है। 
 
गुड़ के दान से मधुर भोजन की प्राप्ति होती है।
 
लवण का दान षड् रस देने वाला होता है। 
 
मनीषियों के अनुसार कुष्मांड का दान सर्वोत्तम है
 
। कन्या का दान लोक-परलोक में संपूर्ण सुखों को पाने वाला बताया गया है।
 
वैसे शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि जिस दान से इंद्रियों की तृप्ति हो, उसे जरूर करना चाहिए।

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