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Friday, 9 September 2011

वास्तुशास्त्र- शुभ दिशा ज्ञान

दिशा सम्बन्धी एक महत्वपूर्ण सूत्र —-
भवन स्वामी के नाम का प्रथम अक्षर जिस अक्षर वर्ग में हो वही दिशा उस के लिए शुभ या (स्नबाल) होती है।
अक्षर वर्ग आठ हैंः- अ, क, च, त, ट, प, य, श।
‘अ’ अक्षर वर्ग में अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ आदि शब्द आते हैं।
इसी प्रकार ‘क’ वर्ग में क, ख, ग, घ, ड़ आदि अक्षर आते हैं। इसी प्रकार अन्य वर्गों का भी अपना अक्षर वर्ग समझें।
1. ये सभी अक्षर वर्ग पूर्वार्द्ध दिशा में क्रम से बलवान होते हैं।
2. प्रत्येक अक्षर वर्ग की अपनी दिशा होती है अतः भवन के स्वामी को मुख्य द्वार अपने अक्षर वर्ग की दिशा में ही बनाना चाहिए।
3. प्रत्येक अक्षर वर्ग की अपने से पाँचवें अक्षर वर्ग के साथ विकट शत्रुता होती है अतः भवन स्वामी को अपने अक्षर वर्ग से पाँचवें अक्षर वर्ग की दिशा में मुख्य द्वार कभी नहीं बनवाना चाहिए।
अक्षर वर्ग- शुभ दिशाः-
1. ‘अ’ वर्ग के लिए पूर्व दिशा शुभ है।
2. ‘क’ वर्ग के लिए आग्नेय दिशा शुभ है।
3. ‘च’ वर्ग के लिए दक्षिण दिशा शुभ है।
4. ‘ट’ वर्ग के लिए नैऋत्य दिशा शुभ है।
5. ‘त’ वर्ग के लिए पश्चिम दिशा शुभ है।
6. ‘प’ वर्ग के लिए वायव्य दिशा शुभ है।
7. ‘य’ वर्ग के लिए उत्तर दिशा शुभ है।
8. ‘श’ वर्ग के लिए ईशान दिशा शुभ है।
पं0 दयानन्द शास्त्री

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