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Wednesday, 3 August 2011

एक ही मंत्र से बनाएं नौ ग्रह बलवान



ग्रहदोष शांति या अनुकूलता के लिए भ्रम और परेशानी को दूर करने के लिये यहां बताया जा रहा है शास्त्रों का ऐसा मंत्र जिसमें नवग्रहों का स्मरण एक ही बार में संभव होता है। अगर कोई इंसान ग्रहों की अनूकुलता से जीवन में सुख-शांति की चाहत रखता है तो यहां बताए नवग्रह मंत्र का जप प्रतिदिन करें-

- प्रात: स्नान कर नवग्रह मंदिर या घर के देवालय में नवग्रहों को विशेष पूजा सामग्री न भी अर्पित कर पाएं तो मात्र गंध, अक्षत, फूल व नैवेद्य चढ़ाकर नीचे लिखे नवग्रह मंत्र का स्मरण कर धूप, दीप से नवग्रहों की आरती करे -

ॐ ब्रह्मामुरारिस्त्रिपुरान्तकारी, भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनि राहु केतव:, सर्वे ग्रहा शान्तिकरा भवन्तु।।

- आरती की पवित्र जोत की ऊर्जा दोनों हथेलियों से ग्रहण कर सिर से पैरों तक फेरें।
ऐसा करना नवग्रहों की प्रसन्नता और शुभ प्रभाव के लिए शुभ माना गया है।

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