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Tuesday, 5 July 2011

क्या है राहू-केतु का राशियों पर प्रभाव!

 आईबीएन-7



राहू के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, राहू के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं। गंभीर समस्यायों से निजात पाने के लिए शास्त्रों में शनिवार के दिन राहू मंत्रों का जाप प्रभावी माना गया है।
1॰ऐसे व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए। 2॰ अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है। 3॰ दिन के संधिकाल में अर्थात सूर्योदय या सूर्यास्त के समय कोई महत्त्वपूर्ण कार्य नही करना चाहिए। 4॰ शनिवार के दिन स्नान कर नवग्रह मंदिर में राहू पूजा के दौरान या पूरे दिन नीले या काले रंग के कपड़े पहनें। 5॰ राहू पूजा में गंध, अक्षत, नीले फूल चढ़ाएं। देव रूप राहू को तिल्ली से बनी बर्फी या लड्डू, मीठी रोटी या मीठे चूरमे का भोग लगाएं। 6॰ राहू मंत्र का जाप करें।
केतु



केतु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु मंगलवार का दिन, केतु के नक्षत्र (अश्विनी, मघा तथा मूल) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
1॰ भिखारी को दो रंग का कम्बल दान देना चाहिए। 2॰ नारियल में मेवा भरकर भूमि में दबाना चाहिए। 3॰ बकरी को हरा चारा खिलाना चाहिए। 4॰ किसी पवित्र नदी या सरोवर का जल अपने घर में लाकर रखना चाहिए। 5॰ केतु मंत्र का जाप करे।
विगत 6 जुन 2011 को राहु और केतु ने अपना स्थान बदला जिसे राशि परिवर्तन कहते है। राहु और केतु किसी भी राशि में 18 महीने तक रहते है। यह दोनों ग्रह वक्री अवस्था में चलते हैं और दोनों अपनी नीच राशी से निकल कर राहु धनु से वृश्चिक में व केतु मिथुन से वृषभ में आयें। यही कुछ लोगों ने इसे 18 वर्ष बाद हुए एक विशेष खगोलीय व ज्योतिषीय घटना का नाम दिया किन्तु ऐसा नहीं है, ग्रहों का यह राशी संक्रमण एक अनवरत प्रक्रिया है।

IBNKhabar

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