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Monday, 4 July 2011

पितरों को नहीं भूलें

पितरों को नहीं भूलें
 न भूलें पितरों की खुशी के ऐसे उपाय



जिन दंपत्तियों के यहां ३ पुत्रियों के बाद एक पुत्र जन्म लेता है या जुड़वां संतान पैदा होती है। उनको सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध जरुर करना चाहिए।

सर्वपित् अमावस्या को पितरों के श्राद्ध से सौभाग्य और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर पितृ आत्मा अपने परिजनों के पास वायु रुप में ब्राह्मणों के साथ आते हैं। उनकी संतुष्टि पर पितर भी प्रसन्न होते हैं। परिजनों के श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने से वह तृप्त और प्रसन्न होकर आशीर्वाद देकर जाते हैं, किंतु उनकी उपेक्षा से दु:खी होने पर श्राद्धकर्ता का जीवन भी कष्टों से बाधित होता है।

सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों की तृप्ति से परिवार में खुशियां लाने का श्राद्धपक्ष का अंतिम अवसर न चूक जाएं। इसलिए यहां बताए जा रहे हैं कुछ उपाय जिनका अपनाने से भी आप पितरों की तृप्ति कर सकते हैं -

- सर्वपितृ अमावस्या को पीपल के पेड़ के नीचे पुड़ी, आलू व इमरती या काला गुलाब जामुन रखें।
- पेड़ के नीचे धूप-दीप जलाएं व अपने कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें। पितरों का ध्यान कर नमस्कार करें। ऐसा करने पर आप जीवन में खुशियां व अनपेक्षित बदलाव जरुर देखेंगे।
- घर के मुख्य प्रवेश द्वार सफेद फूल से सजाएं।
- इस दिन पांच फल गाय को खिलाएं।
- पितरों के निमित्त धूप देकर इस दिन तैयार भोजन में से पांच ग्रास गाय, कुत्ता, कौवा, देवता और चींटी या मछली के लिए जरुर निकालें और खिलाएं।
- यथाशक्ति ब्राह्मण को भोजन कराएं। वस्त्र, दक्षिणा दें। जब ब्राह्मण जाने लगे तो उनके चरण छुएं, आशीर्वाद लें और उनके पीछे आठ कदम चलें।
- ब्राह्मण के भोजन के लिए आने से पहले धूपबत्ती अवश्य जलाएं।

इस तरह सर्वपितृ अमावस्या को श्रद्धा से पूर्वजों का ध्यान, पूजा-पाठ, तर्पण कर पितृदोष के कारण आने वाले कष्ट और दुर्भाग्य को दूर करें। इस दिन को पितरों की प्रसन्नता से वरदान बनाकर मंगलमय जीवन व्यतीत किया जा सकता है।


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