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Wednesday, 22 June 2011

आसन

आसन
* टोटकों का प्रयोग करते समय ओझा, सयाने या साधक को मृग-चर्म, व्याघ्र-चर्म, कुशाशन, कम्बल, रेशमी, ऊन या ताड़-पत्र का आसन या चटाई आदि का प्रयोग करना चाहिए ।
* कपड़ा या बाँस के आसन पर बैठकर टोटकों के प्रयोग करने से रोग, अशान्ति और दरिद्रता मिलती है ।
* तिनकों के आसन पर बैठने से धन और कीर्ति का नाश होता है ।
* लकड़ी के पट्टे, पाटी, कुर्सी आदि पर आसीन होना दुर्घटना को आमंत्रित करना है ।
* बिना आसन जमीन पर बैठकर टोटका करने से मानसिक क्लेश पैदा होता है ।
* पत्थर की चौकी या शिला को आसन के रुप में प्रयोग करना साधक को शारीरिक कष्ट, रोग, पीड़ा, विकृति देता है ।
* किसी भी प्रकार के पत्तों के आसन का प्रयोग भी टोटका के साधक को वर्जित है ।

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