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Monday, 27 June 2011

देशी तरीकों से जाइंट पेन हो जाएगें उडऩ छू


अप्राकृतिक जीवनशैली ने शरीर की दंतुरुस्ती को बुरी तरह से प्रभावित किया है। प्रगति और विकास के नाम पर इंसान ने भले ही सुख-सुविधा के ढेरों-ढेर साधन जुटा लिये हों लेकिन इस पाने के एवज में जो खोया है वह उससे भी ज्यादा कीमती था। चारों तरफ तेजी से फेलते प्रदूषण और नैतिक ह्रास से आधुनिक इंसान शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तरों पर कमजोर और खोखला होता जा रहा है।

हर दिन सैकड़ों नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। चिकित्सा विज्ञान जब तक एक रोग का इलाज खोज पाता है, तब तक चार नए रोग सीना तान कर खड़े हो जाते हैं। जोड़ों का दर्द हो भी गलत खान-पान और प्रदूषण के दुष्प्रभाव का ही एक नतीजा है। असल में हमार शरीर इस प्रकृति का ही एक हिस्सा है। इसलिये शरीर से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी हमें प्रकृति की गोद में ही मिल सकता है। आइये देखते हैं कि अपने अनुभवों के खजाने में से दादी मां जोड़ों के दर्द का क्या समाधान बताती है...
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- सरसों के तेल में चुटकीभर हल्दी मिलाकर धीमी आंच पर गर्म कर लें। इस तेल के ठंडा होने पर शरीर के सभी जोड़ों पर इसकी हल्की मसाज करें। सुबह की नर्म धूप में यह प्रयोग करने पर सीघ्र लाभ मिलता है। मसाज के बाद शरीर को तत्काल ढक लें हवा न लगने दें अन्यथा लाभ की बजाय हानि भी हो सकती है।



- अजवाइन को तवे के ऊपर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें तथा ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। लगातार 7 दिनों तक यह प्रयोग किया जाए तो आठवे दिन से ही जोड़ों के दर्द या कमर दर्द में 100 फीसदी लाभ होता है।




- जहाँ दर्द होता होता है हो वहाँ 5 मिनट तक गरम सेंक, और दो मिनट ठंडा सेंक देने से तत्काल लाभ पहुंचता है।



विशेष:



अपनी क्षमता के अनुसार सुबह के समय आसन विशेषकर सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने से जोड़ों के दर्द से स्थाई रूप से छुटकारा पाया जा सकता है।

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