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Thursday, 30 June 2011

"कूर्म जयंती"


"वास्तु दोष मिटाइए बिना तोड़ फोड़"

आज आपको मिलेगा संम्पति सुख 
बिना तोड़ फोड़-दूर होगा वास्तु दोष 
घर में होगी सुख शान्ति 
धर्म कर्म और अन्न धन से भर उठेगी गृहस्थी 
क्योंकि आपके घर सब सुख लाने वाला है 
सागर का एक चमत्कारी कछुआ 

"कूर्म जयंती"

आपने बाजार में मिटटी अथवा धातुओं के बहुत से कछुयों को देखा होगा जिनको शुभ प्रतीक मान कर बेचा जाता है, जो लोग फेग शुई से जुडी चीजे खरीदते है वो अच्छी तरह से जानते है कि एक कछुआ जीवन में धन संपत्ति का बरदान ले कर आ सकता है, इसलिए भारत ही नहीं विदेशों तक सुख शान्ति वास्तु दोष और धन प्राप्ति के लिए घरों में धातु या मिटटी के बने कछुए रखे जाते हैं, आपके घर पर भी आपने या आपके बच्चों ने भी एक आध कछुया जरूर रखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये साधारण सा कछुआ भगवान विष्णु जी का कूर्म अवतार है आइये हम आपको बताते हैं-कूर्म का अर्थ होता है कछुआ, पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन का बृहद विवरण है, सुखसागर में निहित कथा कहती है कि दैत्यराज बलि के राज्य में दैत्य, असुर तथा दानव बहुत बहुत शक्तिशाली हो गए थे। क्योंकि उनको दैत्यगुरु शुक्राचार्य की महाशक्ति प्राप्त थी। अपने घमंड से चूर रहने वाले देवराज इन्द्र को किसी कारण से नाराज हो कर महारिषि दुर्वासा ने शक्तिहीन होने का शाप दे दिया, जिस कारण इन्द्र शक्तिहीन हो गये थे। मौका पा कर दैत्यराज बलि नें युद्द कर तीनों लोकों पर अपना राज्य स्थापित कर लिया था। अब इन्द्र सहित सभी देवतागण डर डर भटक रहे थे तथा दैत्यों से भयभीत रहते थे। अपनी इस दुर्दशा के निवारण के लिए वे बैकुण्ठनाथ विष्णु जी के पास ब्रह्मा जीसहित पहुचे। उनकी स्तुति करके उन्होंने भगवान विष्णु को अपनी विपदा सुनाई। तब भगवान मधुर वाणी में बोले कि इस समय तुम लोगों के लिये संकट काल है। तुम दैत्यों से मित्रता कर लो और क्षीर सागर को मथ कर उसमें से अमृत निकाल कर पान कर लो। दैत्यों की सहायता से यह कार्य सुगमता से हो जायेगा। इस कार्य के लिये उनकी हर शर्त मान लो और अपना काम निकाल लो। अमृत पीकर तुम अमर हो जाओगे और तुममें दैत्यों को मारने का सामर्थ्य आ जायेगा। भगवान के आदेशानुसार इन्द्र ने समुद्र मंथन से अमृत निकलने की बात दैत्यराज बलि को बताई। दैत्यराज बलि ने देवराज इन्द्र से समझौता कर लिया और समुद्र मंथन के लिये तैयार हो गये। मन्दराचल पर्वत को मथनी तथा वासुकी नाग को नेती बनाया गया। लेकिन जब मन्दराचल पर्वत को सागर में डाला गया तो वो डूबने लगा, जिससे मथन असंभव हो गया, तब स्वयं भगवान श्री विष्णु कूर्म अर्थात कच्छप अवतार लेकर समुद्र में गए, उनहोंने मन्दराचल पर्वत को अपने पीठ पर रखा और स्वयं उसका आधार बन गये। उस समय समस्त लोकपाल दिक्पाल उनकी कूर्म आकृति में स्थित हो गए,योगमाया नें सभी दिशाओं के प्रभाव को स्तंभित कर दिया, तब भगवान् विष्णु जी की सभी देवताओं नें स्तुति की और भगवान् विष्णु ने अपना एक पुरुष रूप दिखाया जिसे वस्तु पुरुष कहा जाता है, क्योंकि मूलतया कूर्म और वस्तु पुरुष एक ही होने से उनकी स्तुति और गणना कछाप अवतार के रूप में की गयी, इस दिव्य रूप में योगमाया आधारशक्ति के रूप में उनके साथ स्थित हुई, इसी लिए वस्तु शतर सहिओत कर्मकांड और पुराण कूर्म को ही प्रधान आसन मानते हैं और वास्तु पुरुष और कूर्म को देख कर ही निर्माण, शुभ दिशा,स्थान आदि का विचार किया जाता है, जिस दिन भगवान विष्णु जी ने कूर्म का रूप धारण किया था उसी को कूर्म जयंती के रूप में मनाया जाता है,शास्त्रों नें इस दिन की बड़ी महिमा गई हैं,इस दिन से निर्माण कार्य शुरू किया जाना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि योगमाया स्तम्भित शक्ति के साथ कूर्म में निवास करती है तो ऐसे में यदि आप वास्तु से जुड़े दोषों को नष्ट अथवा शांत करना चाहते हैं तो इससे सुन्दर अवसर दूसरा नहीं होगा, यदि आपने नया घर भूमि आदि खरीदी है तो उनके पूजन का भी यही समय सबसे उत्तम होता है, सबसे महत्वपूरण तथ्य तो ये है कि इस आप कुछ मंत्र जाप और उपाय कर बिना तोड़ फोड़ के भी वास्तु बदल सकते हैं, या बुरे वास्तु को शुभ में बदल सकते हैं, कूर्म अवतार के समय भगवान् की पीठ का घेरा एक लाख योजन का था। कूर्म की पीठ पर मन्दराचल पर्वत स्थापित करने से ही समुद्र मंथन सम्भव हो सका था। 'पद्म पुराण' में भी इसी आधार पर विष्णु का कूर्मावतार वर्णित है। 

1) महावास्तु दोष निवारक मंत्र 
दुर्भाग्य बश यदि आपका पूरा मकान निवास स्थान या फ्लेट ही वास्तु विरुद्ध बन गया हो और आप किसी भी हालत में उसमें सुधार नहीं कर सकते
तो केवल महावास्तु मंत्र का जाप एवं कूर्म देवता की पूजा करनी चाहिए जिसका विधान है कि 
सबसे पहले लाल चन्दन और केसर कुमकुम मिला कर एक पवित्र स्थान पर कछुए की आकृति बना लेँ 
कछुए के मुख की ओर सूर्य तथा पूछ की ओर चन्द्रमा बना लेँ 
सुबिधानुसार आप धातु का बना कछुआ भी पूजन हेतु प्रयुक्त कर सकते हैं 
फिर धूप दीप फल ओर गंगाजल या समुद्र का जल अर्पित करें 
भूमि पर ही आसन बिछ कर रुद्राक्ष माला से 11 माला मंत्र का जाप करें 
मंत्र-ॐ ह्रीं कूर्माय वास्तु पुरुषाय स्वाहा 
जाप पूरा होने के बाद घर अथवा निवास स्थान के चारों ओर एक एक कछुए का छोटा निशान बना दें 
ऐसा करने से पूरी तरह वास्तु दोष से ग्रसित घर भी दोष मुक्त हो जाता है दिशाएं नकारात्मक प्रभाव नहीं दे पाती उर्जा परिवर्तित हो जाती है 

2)वास्तु दोष निवारक महायंत्र 
यदि आप ऐसी हालत में भी नहीं हैं कि पूजा पाठ या मंत्र का जाप कर सकें और आप नकारात्मक वास्तु के कारण बेहद परेशान है 
घर दूकान या आफिस को बिना तोड़े फोड़े सुधारना चाहते हैं तो उसका दिव्य उपाय है महायंत्र 
वास्तु का तीब्र प्रभावी यन्त्र 
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   121          177          944  
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   533           291          311  
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   657           111          312  
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यन्त्र को आप सादे कागज़ भोजपत्र या ताम्बे चाँदी अष्टधातु पर बनवा सकते हैं 
यन्त्र के बन जाने पर यन्त्र की प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए 
प्राण प्रतिष्ठा के लिए पुष्प धूप दीप अक्षत आदि ले कर यन्त्र को अर्पित करें 
पंचामृत से सनान कराते हुये या छींटे देते हुये 21 बार मंत्र का उच्चारण करें 
मंत्र-ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम:
अब पीले रंग या भगवे रंग के वस्त्र में लपेट कर इस यन्त्र को घर दूकान या कार्यालय में स्थापित कर दीजिये 
पुष्प माला अवश्य अर्पित करें 
इस प्रयोग से एक बार में ही वास्तु दोष हट जाएगा 

3) कूर्म चिन्ह के सरल टोटके 
चांदी के गिलास बर्तन या पात्र पर कछुए का चिन्ह बना कर भोजन करने व पानी पीने से भारी से भारी तनाब नष्ट होता है 
चार पायी बेड अथवा शयन कक्ष में धातु का कूर्म अर्थात कछुआ रखने से गहरी और सुखद निद्रा आती है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होती है 
पूजा के स्थान पर ऐसा श्रीयंत्र स्थापित करें जो कछुए की पीठ पर बना हो इससे घर में सुख शान्ति के साथ साथ धन एवं अच्छे संस्कार आते हैं 
रसोई घर में कूर्म की स्थापना करने से वहां पकने वाला भोजन रोगमुक्ति के गुण लिए भक्त को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है 
यदि नया भवन बना रहे हैं तो आधार में चाँदी का कछुआ ड़ाल देने से घर में रहने वाला परिवार खूब फलता-फूलता है 
बच्चों को विद्या लाभ व राजकीय लाभ मिले इसके लिए उनसे कूर्म की उपासना करवानी चाहिए तथा मिटटी के कछुए उनके कक्ष में स्थापित करें 
यदि आपका घर किसी विवाद में पड़ गया हो या घर का संपत्ति का विवाद कोर्ट कचहरी तक पहुँच गया हो तो लोहे का कूर्म बना कर शनि मंदिर में दान करना चाहिए 
घर की छत में कूर्म की स्थापना से शत्रु नाश होता है 

4)राशि अनुसार किस रंग का कूर्म देगा धन लाभ 
यदि आप व्यापारी है, नौकरी पेशेवाले है, अपना कोई काम करते हैं और धन लाभ प्राप्त ही नहीं कर पाते, 
आपका व्यवसाय नौकरी स्थायी नहीं है धन लाभ हो नहीं पाता या होते होते बंद हो जाता है तो 
आपको पूजा स्थान में अपनी राशी के अनुसार धनप्रदा कूर्म की स्थापना करनी चाहिए 
आइये राशिबार जानते है धनप्रदा कूर्म के बारे में 

5)मेष राशि के जातकों को धनलाभ के लिए सुनहरे रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 7 का अंक लिख दें 
बृष राशि के जातकों को धनलाभ के लिए हरे रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 3 का अंक लिख दें
मिथुन राशि के जातकों को धनलाभ के लिए मटमैले रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 9 का अंक लिख दें
कर्क राशि के जातकों को धनलाभ के लिए आसमानी रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 5 का अंक लिख दें
सिंह राशि के जातकों को धनलाभ के लिए लाल रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 2 का अंक लिख दें
कन्या राशि के जातकों को धनलाभ के लिए भूरे रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 6 का अंक लिख दें
तुला राशि के जातकों को धनलाभ के लिए पीले रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 7 का अंक लिख दें
बृश्चिक राशि के जातकों को धनलाभ के लिए नीले रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 4 का अंक लिख दें
धनु राशि के जातकों को धनलाभ के लिए हरे रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 1 का अंक लिख दें
मकर राशि के जातकों को धनलाभ के लिए जमुनी रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 6 का अंक लिख दें
कुम्भ राशि के जातकों को धनलाभ के लिए काले रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 8 का अंक लिख दें
मीन राशि के जातकों को धनलाभ के लिए सफेद रंग का मिटटी या धातु का कछुया पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए जिसके नीचे आप 5 का अंक लिख दें

6)भूमि दोष नाशक मंत्र उपाय 
यदि आपका घर या जमीन ऐसी जगह है जहाँ भूमि में ही दोष है 
आपका घर किसी श्मशान भूमि कब्रगाह दुर्घट स्थल या युद्ध भूमि पर बना है 
कोई अशुभ साया या जमीनी अशुभ तत्व स्थान में समाहित हों 
जिस कारण सदा भय कलह हानि रोग तानाब बना रहता हो तो जमीन में मिटटी के कूर्म की स्थापना करनी चाहिए 
एक मिटटी का कछुआ ले कर उसका पूजन करें 
पूजन के लिए भूमि पर लाल वस्त्र बिछा लेँ 
फिर गंगाजल से स्नान करवा कर कुमकुम से तिलक करें 
पंचोपचार पूजा करें अर्थात धूप दीप जल वस्त्र फल अर्पित करें 
चने का प्रसाद बनाये व बांटे 
7 माला मंत्र जाप पूर्व दिशा की और मुख रख कर करें 
मंत्र-ॐ आधार पुरुषाय जाग्रय-जाग्रय तर्पयामि स्वाहा
साथ ही एक माला पूरी होने पर एक बार कछुए पर पानी छिड़कें
संध्या के समय भूमि में तीन फिट गढ्ढा कर गाद दें 
समस्त भूमि दोष दूर होंगे  

7)अदृश्य शक्ति नाशक प्रयोग 
यदि आपको लगता है कि आपके घर में कोई अदृश्य शक्ति है 
किसी तरह की कोई बाधा है तो 
कूर्म की पूजा कर उसे मौली बाँध दें 
लाल कपडे में बंद कर धूप दीप करें 
21 बार मंत्र पढ़े 
मंत्र-ॐ हां ग्रीं कूर्मासने बाधाम नाशय नाशय 
रात के समय इसे द्वार पर रखे तथा सुबह नदी में प्रवाहित कर दें 
इससे घर में तुरन शांति हो जायेगी 

8)भूमि भवन सुख दायक प्रयोग 
यदि आपको लगता है कि आपके पास ही घर क्यों नहीं है? आपके पास ही संपत्ति क्यों नहीं है?
क्या इतनी बड़ी दुनिया में आपको थोड़ी सी जगह मिलेगी भी या नहीं तो परेशान मत होइए केवल कूर्म स्वरुप विष्णु जी की पूजा कीजिये 
विष्णु जी की प्रतिमा के सामने कूर्म की प्रतिमा रखें या कागज पर बना कर स्थापित करें 
इस कछुए के नीचे नौ बार नौ का अंक लिख दें 
भगवान् को पीले फल व पीले वस्त्र चढ़ाएं 
तुलसी दल कूर्म पर रखें और पुष्प अर्पित कर भगवान् की आरती करें 
आरती के बाद प्रसाद बांटे व कूर्म को ले जा कर किसी अलमारी आदि में छुपा कर रख लेँ 
इस प्रयोग से भूमि संपत्ति भवन के योग रहित जातक को भी इनका सुख प्राप्त होता है 

9)वास्तु स्थापन प्रयोग 
यदि आपका दरवाजा खिड़की कमरा रसोई घर सही दिशा में नहीं हैं तो उनको तोड़ने की बजाये 
उनपर कछुए का निशान इस तरह से बनाये कि कछुए का मुख नीचे जमीन की ओर हो और पूंछ आकाश की ओर 
ये प्रयोग शाम को गोधुली की बेला में करना चाहिए 
कछुए को रंग से या रक्त चन्दन कुमकुम केसर से भी बनाया जा सकता है 
कछुए का निर्माण करते समय मानसिक मंत्र का जाप करते रहें 
मंत्र-ॐ कूर्मासनाय नम:
कछुया बन जाने पर धूप दीप कर गंगा जल के छीटे दें 
इस तरह प्रयोग करने से गलत दिशा में बने द्वार खिड़की कक्ष आदि को तोड़ने की आवश्यकता नहीं होती ऐसा शास्त्रीय कथन है 

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