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Wednesday, 22 June 2011

टोटको के प्रकार

टोटको के प्रकार
१॰ भावना (कामना) की दृष्टि से टोटका तीन प्रकार के होते है -
क॰ सात्विक भावना से प्रेरित – जैसे दूसरों के दुःख से द्रवित होकर उनके दुःखों को दूर करना, भूत-बाधा, ग्रह-पीड़ा-निवारण इत्यादि।
ख॰ राजसिक विचारों से प्रभावित – अपने घर के बच्चे, स्त्री-पुरुष के रोग, आर्थिक या सम्मान प्राप्ति के लिये किये जाने वाले टोटके इत्यादि।
ग॰ तामसिक वृत्ति के सूचक टोटके – मानसिक कुण्ठा, दमित वासना, धूर्त, दुर्बुद्धि, कुटिलता, ईर्ष्या, द्वेष आदि से प्रेरित होकर मारण, उच्चाटन आदि ।
२॰ प्रयोग के आधार पर टोटके दो प्रकार के हो सकते हैं -
क॰ वस्तु प्रधान – इन टोटकों के करने में किसी विशेष साधन, मंत्र, यंत्र आदि की आवश्यकता नहीं पड़ती, केवल कोई जड़ी, वनस्पति या वस्तु को किसी विशेष समय में, विशेष प्रकार से, विशेष स्थान पर प्रयोग करने से प्रभाव प्राप्त किया जा सकता है । इस प्रकार के टोटकों के लिये किसी साधक, तान्त्रिक, ओझा या सयाने की आवश्यकता नहीं होती है । प्रायः परस्पर की चर्चा में सुनने, घर में बुजुर्गों की सलाह आदि पर करते हुए देखकर ये टोटके परम्परागत रुप से समाज में प्रचलित बने रहते हैं । इस प्रकार के टोटको में जैसे – बच्चों की नजर उतारना, बच्चों का भय दूर करना, कान का दर्द दूर करना, बवासीर आदि के टोटके आते हैं ।
ख॰ दूसरे प्रकार के टोटके वे हैं जिनमें वस्तु के प्रयोग के साथ ही मन्त्र या मन्त्र और यन्त्र दोनों का सहारा लेना पड़ता है और जिनके करने में विशेष सावधानी की आवश्यकता पड़ती है । इनके करते समय विशेष समय, दिशा-बोध, वस्तु या वनस्पति की पहचान, लाने का समय, विशेष मन्त्र या स्तोत्र, आसन आदि का ध्यान रखना होता है ।
३॰ साधक-विचार से ये दो प्रकार के होते हैं -
क॰ प्रभावित व्यक्ति या उसका स्वजन विधि-विधान से इन टोटकों का प्रयोग करे । अथवा -
ख॰ किसी ओझा, सयाने द्वारा इन टोटकों का प्रयोग किया जाये ।

टोटको की प्रामाणिकता को लेकर यदा-कदा सवाल उठते रहे हैं । ध्यान रहे यहाँ इस विषय का समाधान करने की कवायद नहीं है न ही आस्था और अन्धविश्वास को जस्टिफाई किया जा रहा है । इस लेख का उद्देश्य केवल ज्ञान मात्र है, इस लेख माला में प्रकाशित किसी भी टोटके को आजमाने से पुर्व जिज्ञासु बन्धु किसी उचित जानकार व्यक्ति से सलाह कर लें ।

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